Question

…for the foreseeable future:

is it even possible?

I will find out the answer, and report back 😉

PS-Why does this gets thrilled me everytime? Maybe because of Liddell’s take on running,or Vangelis? Maybe both..

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GoTD- 8

तमन्नाओं में उलझाया गया हूँ

खिलौने दे के बहलाया गया हूँ

शाद अज़ीमाबादी

#IndianBudget2019

GOTD- 7

“भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ

दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ”

Remembering #RamPrasadBismil on his birth anniversary. It is, in fact, a privilege to share birth-week with him 😉 People have heard few lines from the iconic Sarfaroshi Ki Tamanna:

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है?
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ!हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है?

एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत,देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है।
रहबरे-राहे-मुहब्बत! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है।

अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़,एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है ।
ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है।

खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है?

है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर।
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।

हाथ जिनमें हो जुनूँ , कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से,
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है , सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।

हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न,जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम।
जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।

यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, “क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?”
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है?

दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज।
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है ! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ।

जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है । देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है ??

I quite like this one as well..

अरूज़े कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां होगा।

रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियां होगा।

I don’t know why this all makes sense even today.

Weird.

Yes

I have been doing a bit of reading about what Stoicism is and how to apply it practically in life. Even before this, I have toyed with quite a few ideas and customised them after extensive beta-testing as per my needs. Maybe this will further refine my priorities and make me a better person.

Maybe not.

But, do I even care 🤪.

I am the guy who splurges 40K on phone and unlocks bootloader within 10 minutes of delivery (voiding warranty) afterall. Am game!

Suggested readings:

  1. Meditations by Marcus Aurelius
  2. Seneca : Letters from a Stoic
  3. Mandela’s biography ( he was introduced to stoicism while he was in prison )

Electoral season!

What an incredibly ‘significant’ this election is turning out to be. No, I am not going to die even if someone i don’t like gets elected. But that aside, I have come to be believe – we will have what we deserve as a nation, nonetheless.

I wonder if it is my (our) destiny to be a witness to such times. I mean i could have very well been born in the 90s and be absurdly pro-right wing (bad generalisation,but 😅) ,or I could have arrived on time ( was born 9 years after my parents’marriage ) and been a diehard Congress guy.

But here I am.